Saturday, November 28, 2009

माथे पर लिखा आपका भविष्य


bhawishyaमाथे के अग्रभाग जिसे ललाट भी कहते हैं, पर बनी रेखाओं से जातक का भविष्य जाना जा सकता है। शिव भक्त रावण मस्तक रेखाओं का अध्ययन करने वाला महान प्रकांड पंडित था। प्राच्य मत के अनुसार मनुष्य के ललाट पर शनि, गुरु, मंगल, सूर्य, शुक्र, बुध और चंद्र सात ग्रहों की सात रेखाएं होती हैं।



यदि मनुष्य के मस्तक पर तीन स्पष्ट अखंडित रेखाएं हों, तो मनुष्य धनवान और संपन्न होता है। यदि मनुष्य का ललाट ऊंचा-नीचा हो, तो जातक दरिद्रता के साए में जीवन गुजारता है। हंसते समय दोनों भृकुटियों के मध्य खड़ी रेखाएं बनती हों, तो ऐसा जातक दयावान, धर्मात्मा एवं सात्विक गुण वाला होता है। ललाट में त्रिशूल, उध्र्व रेखाएं, स्वस्तिक आदि का होना सर्वगुण संपन्न, धन, पुत्र और स्त्री सुख देता है।



आयु का निर्धारण



माथे पर उभरी रेखाओं द्वारा आयु का निर्धारण भी कर सकते हैं। यदि ललाट पर चार अखंडित रेखाएं हैं, तो जातक की आयु 95 वर्ष तक होती है।



ललाट पर अखंडित और कानों तक लंबी रेखाएं होने पर जातक की आयु १क्क् वर्ष तक होती है। यह रेखाएं योगीजन में ज्यादा देखने को मिलती हैं।



यदि ललाट पर पांच स्पष्ट रेखाएं हैं, तो जातक की आयु 70 वर्ष तक होती है। इसके अलावा यदि मस्तक में बहुत छोटी और छिन्न-भिन्न असंख्य रेखाएं हों, तो जातक अनेक प्रकार के दु:खों को भोगने वाला होता है। यदि जातक के ललाट पर मात्र एक गहरी धनुषाकार रेखा हो, तो जातक पर्यटनशील रहता है।



जातक के ललाट पर सर्पाकृति रेखा या दोनों आंखों के मध्य सीधी खड़ी रेखाएं होने पर जातक वक्ता, बलवान और सुंदर होता है। यदि शनि और गुरु की रेखाएं ललाट के ऊपरी भाग में अर्ध चंद्राकर की आकृति होने पर और सूर्य और चंद्र रेखाओं के परस्पर संयोग कर रही हों, तो जातक परम सौभाग्यशाली होता है।



ललाट पर रेखाओं के फल



शानि रेखा



मनुष्य के ललाट पर सबसे पहली रेखा शनि की होती है। यह रेखा यदि स्पष्ट, सीधी, अखंडित है, तो जातक चतुर और बुद्धिमान होता है। यह रेखा यदि टूटी-फूटी हो, तो जातक मूर्ख और चिड़चिड़े स्वभाव का हो जाता है। यदि शनि रेखा टेढ़ी-मेढ़ी और मंगल रेखा धनुषाकार हो, तो जातक गलत आदतों का शिकार होता है और उसका दांपत्य जीवन दु:खभरा होता है।



गुरु रेखा



यह रेखा शनि रेखा के नीचे होती है। यदि यह रेखा स्पष्ट सीधी और अखंडित है, तो जातक धार्मिक, ईमानदार और ज्ञानी होता है। इस रेखा के खंडित होने पर जातक बुद्धिहीन होता है और उसकी स्मरण शक्ति में कमी आ जाती है। गुरु रेखा वृत्ताकार हो, तो जातक सांसारिक कष्टों को भोगता है।



मंगल रेखा



यह रेखा गुरु रेखा के नीचे तीसरी रेखा होती है। अगर यह स्पष्ट सीधी और अखंडित है, तो जातक वीर और साहसी होता है। यदि मंगल रेखा खंडित है, तो जातक कायर होता है और उसमें आत्मविश्वास की बेहद कमी होती है।



बुध रेखा



यदि बुध रेखा अस्पष्ट और अखंडित हो, तो जातक विद्वान, चतुर व्यापारी और श्रेष्ठ वक्ता होता है। दोषपूर्ण होने पर बातूनी और स्वार्थी होता है।



शुक्र रेखा



यदि यह रेखा स्पष्ट और पूर्ण लंबाई वाली हो, तो जातक को पूर्ण दांपत्य सुख प्राप्त होता है। वह सच्च प्रेमी भी होता है। यदि रेखा दूषित है, तो वह प्रेम में धोखा खा सकता है या फिर उसका तलाक हो सकता है।



सूर्य रेखा



दाईं भौंह पर जो रेखा होती है, उसे सूर्य रेखा कहते है। यह रेखा स्पष्ट हो, तो जातक उच्च प्रशासनिक अधिकारी, कूटनीतिज्ञ, राजनेता हो सकता है। यदि यह रेखा टूटी-फूटी हो, तो व्यक्ति को असफलताएं मिलती रहती हैं। साथ ही वह कृपण भी होता है।



चंद्र रेखा



बाईं भौंह पर जो रेखा होती है, उसे चंद्र रेखा कहते हैं। यदि यह रेखा पूर्ण और स्पष्ट हो, तो जातक की खूब यात्राएं होती हैं। जातक कलाप्रेमी, कल्पनाशील हाता है। यदि यह रेखा खंडित हो, तो जातक कठोर हृदय वाला और मंदबुद्धि होता है।

Saturday, October 17, 2009

लक्ष्मी पूजन की कहानी

दीपावली की रात्रि में हमारे देश में लक्ष्मी पूजन करने की प्रथा सदियों पुरानी है। कभी आपने यह सोचा है कि यह पूजन क्यों किया जाता है। इससे सम्बन्धित एक पौराणिक कथा इस प्रकार है, बहुत साल पहले की बात है एक धनवान जमींदार था।
उसकी एक खूबसूरत लड़की थी, जिसका नाम किरण था। किरण प्रतिदिन अपने गांव के मंदिर में पुष्प चढ़ाने जाया करती थी और लौटते वक्त रास्ते में पीपल के पड़ के नीचे कुछ देर ठहर जाया करती थी। वो वहां पीपल के पत्तों से झरती नन्हीं ठंडी बूंदों का आन्नद लिया करती थी।
रोज की तरह उस दिन भी वो पीपल के पेड़ के नीचे ठंडी बून्दों का आन्नद ले रही थी , तभी लाल वस्त्रों में लिपटी एक स्त्री उसके पास आकर बोली -‘किरण प्रतिदिन जो ठंडी बूंदे इस पेड़ से बरसती हैं , वह सब मेरी ही कृपा है। दरअसल मैं पेड़ पर निवास करती हूं , देखो ऊपर मेरा घोंसला है। सुनकर किरण हंसी तो उस स्त्री ने कहा कि मैं चिड़िया नहीं लक्ष्मी हूं ।’
मैं जैसा चाहे रूप बदल सकती हूं। उसी से मैं बहुत प्रसन्न होती हूं और उसके घर पर धन की बरसात करती हूं। फिर उस स्त्री ने कहा कि आज मैं तुम्हें अपनी सखी बनाती हूं चलो मेरे घर। उस स्त्री ने किरण का हाथ पकड़ा और दूसरे ही पल में वह एक विशाल महल में पहुंच गई । वहां उस स्त्री ने उसका भव्य स्वागत किया।
तरह - तरह के व्यंजन खिलाए और सोने के झूले में झुलाते हुए कहा कि - ‘अब से हम दानों पक्की सहेलियां हैं । हां कल मैं तुम्हारे घर खाना खाने आऊंगी । फिर उस स्त्री ने तुरन्त किरण को पेड़ के नीचे लाकर छोड़ दिया। किरण जब देर से घर पहुंची तो पिता ने देरी का कारण पूछा ।
किरण ने सारी बात बताते हुए कहा , मुझे जो स्त्री मिली थी वो लक्ष्मी थी और हां कल अपने यहां खाना खाने आएंगी। लेकिन दूसरे ही पल किरण उदास हो गई। पिता ने पुत्री को समझाया ‘तू चिंता मत कर बेटी । हम अपनी हैसियत के मुताबिक उनका सत्कार अवश्य करेंगे। ’
फिर पिता ने कहा कि तू घर को लीप पोत कर स्वच्छ बना ले। घर में चारों ओर उजाला कर ले’। जब किरण घर की सफाई कर आंगन लीप पोत रही थी तभी आकाश में उड़ती हुई एक चील की चोंच से छूट कर एक नौलखा हार उसके आंगन में आ गिरा ।
यह लक्ष्मी जी की कृपा का फल है, हार को देखकर लड़की के पिता ने हर्ष पूर्ण मुद्रा में कहा। उस हार को बाजार में बेच कर जमींदार ने सोने चांदी के बर्तन खरीदे और रेशमी वस्त्र भी। लक्ष्मी जी जब पास आईं तो उनका शानदार स्वागत पिता पुत्री ने किया।
लक्ष्मी जी प्रसन्न हो कर लौट गईं। लक्ष्मी जी की इसी कृपा को पाने के लिए सर्वत्र पूजा की जाने लगी और घर दीपों से जगमगाने लगे।

Thursday, September 17, 2009

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बैंक नोट: वो सबकुछ जो आप हमेशा जानना चाहते थे
विशेषः चारों तरफ जाली नोटों का हल्ला मचा हुआ है। ऐसे में नकली को असली नोटों से अलग कैसे पहचानें, यह तो हम पढ़ते रहे हैं। इसी बीच यह भी प्रश्न खड़ा होता है कि नोटों का मामला आखिर क्या है? इस पूरी नजर..
कौन तय करता है कि कितने छपेंगे?
कब और कितने करेंसी नोट छपने हैं, इसका फैसला रिजर्व बैंक करता है। इसे करेंसी मैनेजमेंट कहते हैं। बैंक किस मूल्य के कितने नोट छापेगा, यह विकास दर, मुद्रास्फीति दर, कटे-फटे नोटों की संख्या और रिजर्व स्टॉक की जरूरतों पर निर्भर करता है। करेंसी नोट की मांग का पता लगाने के लिए सांख्यिकीयविधियों का सहारा लिया जाता है।
इन्हें कहां पर छापा जाता है स्याही, कागज कहां का?

देश में चार बैंक नोट प्रेस, चार टकसाल और एक पेपर मिल है। नोट प्रेस मध्यप्रदेश के देवास, नासिक, सालबोनी और मैसूर में हैं। 1000 के नोट मैसूर में छपते हैं। देवास की नोट प्रेस में एक साल में 265 करोड़ नोट छपते हैं। इनमें 20, 50, 100, 500 रुपए मूल्य के नोट शामिल हैं। देवास में तैयार स्याही का ही उपयोग किया जाता है। मप्र के ही होशंगाबाद में सिक्यूरिटी पेपर मिल है। नोट छपाई पेपर होशंगाबाद और विदेश से आते हैं। जबकि टकसाल मुंबई, हैदराबाद, कोलकाता और नोएडा में हैं।
हम तक करेंसी कैसे पहुंचती है?

रिजर्व बैंक के देशभर में 18 इश्यू ऑफिस हैं। ये अहमदाबाद, बेंगलुरू, बेलापुर, भोपाल, भुवनेश्वर, चंडीगढ़, चेन्नई, गुवाहाटी, हैदराबाद, जयपुर, जम्मू, कानपुर, कोलकाता, मुंबई, नागपुर, नई दिल्ली, पटना व थिरुवनंतपुरम में स्थित हैं। इसके अलावा एक सब-ऑफिस लखनऊ में है। प्रिंटिग प्रेस में छपे नोट सबसे पहले इन ऑफिसों में पहुंचते हैं। यहां से उन्हें कमर्शियल बैंक की शाखाओं को भेजा जाता है।
बेकार हो चुके नोटों को कहां जमा करते हैं?

नोट तैयार करते वक्त ही उनकी ‘शेल्फ लाइफ’ (सही बने रहने की अवधि) तय की जाती है। यह अवधि समाप्त होने पर या लगातार प्रचलन के चलते नोटों में खराबी आने पर रिजर्व बैंक इन्हें वापस ले लेता है। बैंक नोट व सिक्के सर्कुलेशन से वापस आने के बाद इश्यू ऑफिसों में जमा कर दिए जाते हैं। रिजर्व बैंक सबसे पहले इनके असली होने की जांच करता है। उसके बाद इन नोटों को अलग किया जाता है, जो दोबारा जारी किए जा सकते हैं। बेकार हो चुके नोटों को नष्ट कर दिया जाता है। इसी तरह सिक्कों को गलाने के लिए मिंट भेज दिया जाता है।
बैंक नोट क्यों कहते हैं?

रिजर्व बैंक द्वारा जारी किए जाने के कारण इन्हें बैंक नोट कहा जाता है।
कैसे छपते हैं?

विदेश या होशंगाबाद से आई पेपर शीट एक खास मशीन सायमंटन में डाली जाती है। फिर एक अन्य मशीन जिसे इंटाब्यू कहते हैं उससे कलर किया जाता है। यानी कि शीट पर नोट छप जाते हैं। इसके बाद अच्छे और खराब नोट की छटनी हो जाती है। खराब को निकालकर अलग करते हैं। एक शीट में करीब 32 से 48 नोट होते हैं।
कैसे नंबर अंकित करते हैं?

शीट पर छप गए नोटों पर नंबर डाले जाते हैं। फिर शीट से नोटों को काटने के बाद एक-एक नोट की जांच की जाती है। फिर इन्हें पैक किया जाता है। पैकिंग के बाद बंडलों को विशेष सुरक्षा में ट्रेन से भारतीय रिजर्व बैंक तक भेजा जाता है।
क्या खासियत होती है

इनमें?* बैंक नोट की संख्या चमकीली स्याही से मुद्रित होती है। बैंक नोट में चमकीले रेशे होते हैं। अल्ट्रावायलेट रोशनी में दोनों देखे जा सकते हैं।* कॉटन और कॉटन के रेशे मिश्रित एक वॉटरमार्क पेपर पर नोट मुद्रित किया जाता है।* नई श्रंखला वाले 500 और 1000 रुपए मूल्य के नोट की छपाई के लिए प्रति वर्ग सेमी वजन को बढ़ाने के साथ-साथ अधिक मोटाई वाले कागज का उपयोग किया गया है।
कैसे होती है कर्मचारियों की जांच?

नोट छपाई में लगे कर्मचारियों व अफसरों की बिना कपड़ों के जांच की जाती है। इसके सहित वे जांच की चार-पांच कड़ी प्रक्रियाओं से गुजरते हैं।
कहां रखे जाते हैं?

बैंक नोट व रुपए के सिक्के : करेंसी चेस्टछोटे सिक्के : डिपो
कब बड़े नोट हुए बाहर?

वर्ष 1946 तक 1,000 व 10,000 रुपए मूल्य के नोट सकरुलेशन में थे। लेकिन, कालेधन पर नियंत्रण पाने के लिए इसी वर्ष इन्हें डीमॉनीटाइज (इस्तेमाल खत्म) कर दिया गया। वर्ष 1954 में 1,000, 5000 व 10000 रुपए मूल्य के नोट फिर से पेश किए गए। वर्ष 1978 में इन्हें फिर डीमॉनीटाइज कर दिया गया। अब नए सिरे से बाजार में उतरे 1,000 मूल्य के नोट चलन में हैं।
नकली नोट का मुआवजा मिलेगा?

इंग्लैंड के समान भारत में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है कि आपके पास धोखे से आए नकली के बदले आपको मुआवजा मिले। नकली नोटों को नष्ट करना ही अंतिम विकल्प है। नकली नोट मिले तो इसे सीधे किसी बैंक में जाकर सौंप दें। यदि बैंक नोट लेने से इनकार करे तो वहां अधिकारियों को आरबीआई के निर्देशों के बारे में याद दिलाएं। तब बैंक इस नोट पर ‘नकली’ का ठप्पा लगाएगी और पुलिस में एफआईआर भी करेगी।
बैंक नोटों और सिक्कों को एक-एक बार आयातित भी किया ?

गयाबैंक नोटों और सिक्कों की आपूर्ति बढ़ाने के लिए केंद्र ने दो बार उपाय किए हैं। वर्ष 1997, 1998 में मांग-आपूर्ति के अंतर को पूरा करने के लिए सरकार ने केवल एक बारगी उपाय के रूप मे बैंक नोटों को आयातित किया। वहीं वर्ष 2002-2003 में अपने चार टकसालों से होनेवाली आपूर्ति में वृद्धि करने के लिए रुपया सिक्के भी सरकार ने आयातित किए। अब बैंक नोट और सिक्के, दोनों की आपूर्ति की स्थिति ठीक है।
किन की छपाई हुई बंद?

1, 2 व 5 रुपए मूल्य के नोटों की छपाई बंद हो चुकी है। हालांकि, बाजार में अब भी उनका इस्तेमाल हो रहा है और यह कानूनन सही है।
सिक्के कितने बनाने हैं कौन तय करता है?

रिजर्व बैंक से प्राप्त मांग पत्र के आधार पर इसका फैसला भारत सरकार करती है। सिक्के बनाने की इकाई टकसाल यानी मिंट से उनकी लाट हैदराबाद, कोलकाता, मुंबई व नई दिल्ली के रिजर्व बैंक ऑफिसों तक पहुंचाई जाती है।
क्या पॉलीमर नोट उपाय है जाली से बचने का?

जी हां, इन नोटों में ऐसे कई सुरक्षा मानक प्रबंध होते हैं, जो पेपर नोट में नहीं होते। चूंकि पॉलीमर नोट के कई सुरक्षा मानकों की फोटोकॉपी या स्कैनिंग कर दोबारा नहीं बनाया जा सकता, इसलिए इनके नकली नोट बनाना बेहद मुश्किल है। पॉलीमर नोट दोनों तरफ से अलग-अलग रंग के हो सकते हैं। पेपर नोट की तरह इनमें भी वाटरमार्क लगाया जा सकता है। पॉलीमर नोट ‘पॉलीमर बाइएक्सियलीओरिएंटेड पॉलीप्रोपिलीन’ मटेरियल से बनाए जाते हैं।
ज्यादा नोट छापने या मुद्रा का मूल्य गिरने से आखिर कितना बुरा हो सकता है?


तराजू में नोट तोलने पड़े

9/11 के बाद जब अमेरिका ने अफगानिस्तान पर हमला किया तो मुद्रा का मूल्य इतना गिर गया कि सब्जी लेने के बदले तराजू भर कर नोट देना पड़ते थे।
ब्रेड के टुकड़े के लिए10 जनवरी 2009 को जिम्बॉम्बे में मुद्रा का मूल्य इतना गिर गया कि ब्रेड की 2 स्लाइस की कीमत करोड़ों रुपए तक पहुंच गई।

Monday, August 24, 2009

नंद भारद्वाज को बिहारी पुरस्कार

नंद भारद्वाज को बिहारी पुरस्कार
25 अगस्त 2009, 01:39 hrs IST
जयपुर। पत्रकार, लेखक एवं साहित्यकार नंद भारद्वाज को सोमवार शाम के.के.बिडला फाउंडेशन के प्रतिष्ठित 'बिहारी पुरस्कार' से नवाजा गया। यह पुरस्कार राजस्थान के हिंदी एवं राजस्थानी लेखकों को दिया जाता है। भारद्वाज को वर्ष 2008 का यह पुरस्कार 'हरी दूब का सपना' कृति के लिए दिया गया है। जवाहर कला केन्द्र के रंगायन सभागार में हुए समारोह में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उन्हें प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह एवं एक लाख की राशि प्रदान की। समारोह में के.के.बिडला फाउंडेशन की अध्यक्षा शोभना भरतिया, फाउंडेशन के निदेशक निर्मलकांति भट्टाचार्जी, निर्णायक समिति की अध्यक्षा प्रो.रमा सिंह, मंत्रिमंडल के सदस्य, साहित्यकार एवं शहर के गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
शोभना ने भारद्वाज के लेखन की तारीफ करते हुए कहा कि उनकी कविताएं मरू भूमि की सौंधी सुगन्ध से परिचय कराती हैं। प्रो. रमा सिंह ने कहा कि भारद्वाज की कृति आत्मसंवेदना और अनुभवों का दस्तावेज है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि लेखक, पत्रकार एवं साहित्यकार सदियों से समाज एवं सरकार का मार्गदर्शन करते आए हैं। वे हमेशा से सम्मानित रहे हैं और आगे भी रहेंगे।
सृजनशीलता को स्नेह पुरस्कार ग्रहण करने के बाद भारद्वाज ने कहा कि पुरस्कार साहित्यकार के सृजनात्मक कार्य को लोगों की नजरों में लाने का अवसर प्रदान करता है। वे इसे अपनी रचनाधर्मिता के प्रति स्नेह के रूप में देखते हैं।
40 कविताओं का संग्रहपुरस्कृत कृति 'हरी दूब का सपना' 40 कविताओं का संग्रह है। ये कविताएं मरूभूमि की विषमताएं, प्राकृतिक आपदाएं एवं सामाजिक विसंगतियों पर केन्द्रित हैं। कुछ कविताएं स्त्री की स्थिति, देश की समसामयिक समस्याओं एवं सामाजिक गैर-बराबरी के दर्द को भी बयां करती हैं।