Saturday, July 7, 2012

आयुर्वेदिक लिस्ट: : जानिए किस महीने में क्या नहीं खाना चाहिए ?

अच्छे भोजन से हमारा शरीर तंदुरुस्त बना रहता है। जल्दी थकान नहीं होती और साथ ही कई छोटी-छोटी बीमारियां भी पास नहीं आती हैं। आयुर्वेद में शरीर को स्वस्थ रखने  के लिए खाने से संबंधित कई नियम बताए गए हैं। इन्ही नियमों के अंतर्गत पूरे साल के हर महीने के लिए कुछ ऐसी चीजें बताई गई हैं, जिन्हें उन महीनों में नहीं खाना चाहिए।

पुराने समय की एक कहावत है-

- चौते गुड़, वैशाखे तेल, जेठ के पंथ, अषाढ़े बेल।

सावन साग, भादो मही, कुवांर करेला, कार्तिक दही।

अगहन जीरा, पूसै धना, माघै मिश्री, फाल्गुन चना।

जो कोई इतने परिहरै, ता घर बैद पैर नहिं धरै।

साल के किस महीने में क्या न खाएं- जनवरी-फरवरी: जनवरी और फरवरी में मिश्री नहीं खाना चाहिए।
मार्च-अप्रैल: इस समय गुड़ नहीं खाना चाहिए।
अप्रैल-मई: इसमें तेल व तली-भुनी चीजों से परहेज करना चाहिए।
मई-जून: इन महीनों में गर्मी का प्रकोप रहता है अत: ज्यादा घूमना-फिरना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
जून-जुलाई: हरी सब्जियों के सेवन से बचें।
जुलाई-अगस्त: दूध व दूध से बनी चीजों के साथ ही हरी सब्जियां भी न खाएं।
अगस्त-सितंबर: इन दो महीनों में छाछ, दही नहीं खाना चाहिए।
सितंबर-अक्टूबर: इस माह में करेला वर्जित माना गया है।
अक्टूबर-नवंबर: इन दो महीनों में भी दही और दही से बनी अन्य चीजें नहीं खाना चाहिए।
नवंबर: दिसंबर: इस समय में भोजन में जीरे का उपयोग नहीं करना चाहिए।
दिसंबर-जनवरी: इन दोनों माह में धनिया नहीं खाना चाहिए क्योंकि धनिए की प्रवृति ठंडी मानी गई है और सामान्यत: इस मौसम में बहुत ठंड होती है।

Thursday, July 5, 2012

खून की कमी हो जिन्हें... उन्हें ये चीजें खाना चाहिए, कमी दूर हो जाएगी

अक्सर शरीर में खून की कमी हो जाने पर कमजोरी, थकावट, चक्कर आना आदि परेशानियां हो जाती हैं। अगर आपके साथ भी ये समस्याएं हैं तो आपके शरीर में खून की कमी हो सकती है। शरीर में खून की कमी का मुख्य कारण लौह तत्व की कमी होती है। लौह तत्व बढ़ाने का सबसे अच्छा तरीका है, भोजन से इसकी पूर्ति करें। आज हम आपको बताने जा रहे हैं भोजन से जुड़ी कुछ चीजों के बारे में जो खून की कमी को दूर करती हैं।
- रोज रात को बादाम भिगोकर सुबह पीसकर दूध में मिलाकर पीने से भी खून की कमी नहीं होती है।
- हरी सब्जियां, दालें व ड्रायफ्रूटस आदि भी खून की कमी को दूर करते हैं।
- सेब, टमाटर व पालक आदि को विशेष रूप से भोजन में शामिल करें।
- रोजाना सलाद खाने व शहद लेने से शरीर में हीमोग्लोबिन बढ़ता है।
- खून बढ़ाने के लिए हरे मटर, हरे चने(छोले), अंकुरित अनाज, अंडे, दूध आदि को अपने भोजन में शामिल करें।
- सोयाबिन का दूध भी फायदेमंद होता है
-चाय,काफी और एन्टासिड जैसी दवाएं उपयोग में न लाएं। ये चीजें शरीर द्वारा तत्व ग्रहण करने की प्रक्रिया को बाधित करते हैं।
- मैथी दाने अंकुरित कर नियमित रूप से खाने से खून की कमी पूरी हप जाती है।

Wednesday, July 4, 2012

एक और संकेत: इस 21 दिसंबर को खत्‍म हो जाएगी दुनिया?


वाशिंगटन. माया सभ्यता के कैलेंडर के बाद अब 1300 साल पुराना माया सभ्यता का टेक्स्ट मिला है, जिसमें कहा गया है कि दिसंबर 21, 2012 को दुनिया का विनाश तय है। यह टेक्स्ट ग्‍वाटेमाला के ला कोरोना की साइट पर मिला है। यह टेक्स्ट प्राचीन राजनीतिक इतिहास के बारे में हैरतंगेज जानकारी देता है।

इसी साल मई में स्टुअर्ट नाम के विशेषज्ञ ने सबसे पहली बार ग्वाटेमाला के ला कोरोना इलाके में एक सीढ़ी पर माया टेक्स्ट का पता लगाया था। इसी टेक्स्ट में दुनिया के अंत की बात बताई गई है। यह सीढ़ी तब बनाई गई थी जब युकनूम नाम का राजा इस इलाके में आया था। युकनूम अपने समय में माया सभ्यता का सबसे ताकतवर शासक था, जिसे बाद में टिकाल नाम के विरोधी के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। 



माया टेक्स्ट से पहले माया कैलेंडर भी मिल चुका है, जो दुनिया के अंत की तारीख बताता है। इस कैलेंडर में 21 दिसंबर, 2012 के बाद की तारीख नहीं दी गई हैं, इसका अर्थ यही समझा जा रहा है कि इस दिन दुनिया पर खतरा मंडरा सकता है। माया कैलेंडर के मुताबिक 21 दिसंबर, 2012 में एक ग्रह पृथ्वी से टकराएगा, जिससे सारी धरती खत्म हो जाएगी। करीब 250 से 900 ईसा पूर्व माया नाम की एक प्राचीन सभ्यता स्थापित की गई थी। ग्वाटेमाला, मैक्सिको, होंडुरास और यूकाटन प्रायद्वीप में इस सभ्यता के अवशेष खोजकर्ताओं को मिले हैं।

प्राचीन माया सभ्यता के काल में गणित और खगोल के क्षेत्र में उल्लेखनीय विकास हुआ था। अपने ज्ञान के आधार पर माया लोगों ने एक कैलेंडर बनाया था। कहा जाता है कि उनके द्वारा बनाया गया कैलेंडर इतना सटीक निकला है कि आज के सुपर कम्प्यूटर भी उसकी गणनाओं में 0.06 तक का ही फर्क निकाल सके और माया कैलेंडर के अनेक आकलन, जिनकी गणना हजारों सालों पहले की गई थी, सही साबित हुए हैं।

शूलतुन के जंगलों में माया सभ्यता का एक महत्वपूर्ण शहर होने के बारे में पहली बार 1915 में पता चला था। इसके बाद यहां खजाना चोरों ने कई बार सेंध लगाने का प्रयास किया। प्रोफेसर सैटनरे के छात्र मैक्स चेम्बरलिन ने जब 2010 में एक सुरंग से जाकर यहां कुछ भित्तिचित्रों के होने का पता लगाया तो पूरी टीम खुदाई में जुट गई और उन्होंने सदियों से गुमनामी में खोए माया सभ्यता के इस प्राचीन शहर को ढूंढ निकाला। यह पूरा शहर 16 वर्गमील में फैला हुआ है और इसे पूरी तरह से खोदकर बाहर निकालने के लिए अगले दो दशकों का समय भी कम है।

Monday, July 2, 2012

तत्काल टिकट के लिए आया नया नियम, फोन पर देना होगा सही जवाब


इंदौर।रेलवे की आईआरसीटीसी वेबसाइट से टिकट बुक कराने वाले सावधान हो जाइये। यदि सुबह आठ से सवा आठ बजे के बीच तत्काल टिकट बुक कराया तो हो सकता है कुछ देर में ही आपके फोन की घंटी बज उठे।

यह कॉल दिल्ली के आईआरसीटीसी कॉल सेंटर से होगा जो जिस यूजर आईडी से टिकट बुक किया गया है उसके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर या दिए गए एसएमएस नंबर पर आ सकता है। फोन पर आपसे यात्रा के बारे में सारी डिटेल पूछी जाएगी। यदि एक भी जानकारी गलत दी गई तो तुरंत आपका टिकट कैंसिल किया जा सकता है। आपके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की बात कही गई है।

आईआरसीटीसी के क्षेत्रीय अधिकारियों के मुताबिक वेरिफिकेशन कॉल यात्रा से पहले किसी भी समय आ सकता है। ऐसे में किसी एजेंट ने तत्काल टिकट बुक कराया है तो वह पूछे गए सवालों के सभी सही जवाब नहीं दे पाएगा। अधिकारियों का मानना है कि तत्काल में सबसे ज्यादा धांधली तत्काल खुलने के बाद पहले 15 मिनट तक ही होती है। १क् जुलाई से यह व्यवस्था तत्काल के ओपनिंग समय में परिवर्तित हो जाएगी। हालांकि इसकी सफलता और सही संचालन पर संशय बना हुआ है क्योंकि प्रतिदिन हजारों टिकट तत्काल के तहत बुक होते है जिनमें से कई यात्री अपने परिवार के सदस्यों से टिकट बुक कराते है।

इनके देना पड़ेंगे जवाब

यूजर आईडी : जिस यूजर आईडी से ई-टिकट बुक कराया है वह बताएं। यदि टिकट खरीदा या बेचा गया है तो यह बताने में परेशानी आएगी।

पीएनआर नंबर : टिकट का पीएनआर नंबर क्या है। कहां से कहां तक यात्रा कर रहे है।

यात्रियों की जानकारी : टिकट पर कौन-कौन से यात्री सफर कर रहे है उनकी उम्र क्या है उनको कौन सी बर्थ अलॉट की गई है।

मोबाइल नंबर : किसी सह यात्री का मोबाइल नंबर बताओ।

क्या है तत्काल स्कीम

कोई भी व्यक्ति अधिकृत रेलवे काउंटर या वेबसाइट्स के जरिए तत्काल स्कीम के तहत यात्रा के एक दिन पहले टिकट बुक कर सकता है। इसके लिए उन्हें अतिरिक्त राशि चुकानी होती है। आरोप है कि आम लोगों को इसका फायदा नहीं मिलता। कुछ दलाल स्कीम की खामियों का लाभ उठा रहे हैं।

जांच करेगा सीवीसी!

केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) तत्काल सेवा में धांधलियों की शिकायत की जांच शुरू कर सकता है। वह यह देखना चाहेगा कि कहीं रेलवे के अधिकारी इस भ्रष्टाचार में लिप्त तो नहीं हैं? सीवीसी खुद जांच कर सकता है। रेलवे के मुख्य सतर्कता अधिकारी को भी इसके लिए निर्देश दिए जा सकते हैं।

एक अधिकारी ने कहा, ‘आयोग तत्काल योजना में अनियमितताओं की खबरों से वाकिफ है। उसे भी कुछ शिकायतें मिली हैं। तथ्यात्मक स्थिति जानने और गड़बड़ी का पता लगाने के लिए मामले की जांच पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, जांच समिति के गठन पर अब तक कोई फैसला नहीं हुआ है। जांच का आदेश दिया जाता है तो यह रेलवे अधिकारियों तथा दलालों के कथित गठजोड़ पर आधारित होगी। यह योजना की खामियों को भी देखेगी।’ हालांकि सीवीसी के सचिव केडी त्रिपाठी ने घटनाक्रम पर कोई टिप्पणी करने से मना कर दिया। वह आयोग के प्रवक्ता के रूप में भी काम करते हैं।

Friday, June 29, 2012

ऐसे सबसे पहले ऑनलाइन तत्काल टिकट बुक कर लेते हैं दलाल



आम आदमी रेलवे के तत्काल टिकट की लाइन में रात भर लगता है लेकिन फिर भी नंबर नहीं आता। सुबह जल्दी जागकर मिनट दर मिनट ऑनलाइन टिकट बुक करने के लिए आठ बजने का इंतेजार करते हैं और फिर भी आईआरसीटीसी की वेबसाइट नहीं खुलती। लेकिन दलाल मिनटों में टिकट बुक करा लेते हैं।


तत्काल टिकटों के दलाल रेलवे के सिस्टम को मात देने के लिए कुछ ऐसा दिमाग चलाते हैं कि आम लोग अपने बेव ब्राउजर को रिफ्रेश करते रहते हैं और टिकट दलालों के हो जाते हैं।


ऐसे तत्काल सिस्टम को मात दे देते हैं रेलवे टिकटों के दलाल....


1. दलाल आईआरसीटीसी की वेबसाइट खोलने के लिए फास्ट इंटरनेट कनेक्शन का इस्तेमाल करते हैं ताकि सर्वर से जल्दी जुड़ सकें। अक्सर दलाल एमटीएनएल या बीएसएनएल का कनेक्शन इस्तेमाल नहीं करते।


2. 8 बजे से 9 बजे के बीच एक आईपीए एड्रेस से दो ही तत्काल टिकट बुक किए जा सकते हैं लेकिन दलाल अपने सिस्टम का आईपी एड्रेस ही बदल देते हैं। ऐसा करने के लिए वो अपने इंटरनेट मोडम को बंद करके दोबारा चालू कर देते हैं। अक्सर मोडम बंद करके दोबारा चालू करने पर सिस्टम का आईपी एड्रेस बदल जाता है। पांच मिनट से ज्यादा देर तक मोडम को बंद करके या फिर इंटरनेट केबल को निकालकर दोबारा लगाने पर आईपी पता अक्सर बदल जाता है। ऐसा करके दलालों को नया आईपीए एड्रेस मिल जाता है और रेलवे का सिस्टम उन्हें ब्लॉक नहीं कर पाता।


3. दलाल अपने कंप्यूटर के टाइम को आईआरसीटीसी की वेबसाइट के टाइम से मिला लेते हैं। जैसे ही उनके सिस्टम में आठ बजते हैं वो टिकट बुक करने का प्रयास करते हैं। ऑनलाइन बुकिंग शुरु होने के कुछ सेकेंड्स बाद ही टिकट बुक करने पर टिकट मिलने का चांस सबसे ज्यादा होते हैं।


4. कई बार दलाल विदेश में बैठे अपने दोस्तों के जरिए टिकट बुक कराते हैं। विदेशी इंटरनेट सर्वरों पर लोड कम होता है और इंटरनेट स्पीड भी बेहद तेज मिलती है जिस कारण विदेश से टिकट बुक कराना बेहद आसान होता है।



5. दलाल ऑनलाइन बुकिंग फार्म को जल्दी भरने के लिए फायरफॉक्स ब्राउजर की आटो फिल एप्लीकेशन का इस्तेमाल करते हैं। जिन टिकटों को बुक किया जाना होता है उनकी जानकारी पहले से ही फार्म में भर दी जाती है और ऑनलाइन टिकट बुकिंग शुरु होते ही वो फार्म सबमिट कर देते हैं।

Tuesday, June 26, 2012

डाउनलोड करना चाहते हैं फ्री एंटीवायरस, तो ये हैं 'पांच' बेहतरीन वेबसाइट्स

इंटरनेट में एक तरफ जहां पूरी दुनिया की जानकारी रहती है, वहीं इसमें कई ऐसे घातक वायरस भी रहते हैं, जो आपके कंप्यूटर को नुकसान पहुंचा स‍कते हैं। हालांकि अगर आप इंटरनेट सर्फिग के दौरान सेफ साइट को ओपन करते हैं, तो पीसी में वायरस आने का खतरा नहीं रहता। फिर भी वायरस से बचने के लिए एंटीवायरस का होना बेहद जरूरी है।

इससे न केवल पीसी सुरक्षित रहता है, बल्कि डाटा भी कोई नहीं चुरा सकता। इंटरनेट में भी कई एंटीवायरस मौजूद हैं, जिन्‍हें फ्री में डाउनलोड कर सकते हैं। जानते हैं कुछ ऐसे ही फ्री एंटीवायरस के बारे में।

कोमोडो इंटरनेट सिक्योरिटी प्रीमियम एंटीवायरस : www.comodo.com/home/internet-security/free-internet-security.php 


पांडा क्लाउड एंटीवायरस : www.cloudantivirus.com/en/

माइक्रोसॉफ्ट सिक्योरिटी एसेंशियल्स एंटीवायरस : www.microsoft.com/en-in/security_essentials/default.aspx 

अवीरा एंटीविर पर्सनल फ्री एंटीवायरस : www.avira.com/en/avira-free-antivirus

अवास्त फ्री एंटीवायरस : www.avast.com/free-antivirus-download 

Sunday, June 24, 2012

फेसबुक पर न करें ये दस चीजें

फेसबुक के लाइफबुक बनने की वजह से लोग अक्सर भूल जाते हैं कि सोशल नेटवर्किंग जैसे मंच पर क्या दिया जाना चाहिए और क्या  नहीं। हमें यह बात ध्यान रखनी चाहिए कि जो चीजें निजी दायरे में अच्छी लगती हैं, उन्हें फेसबुक पर डालना आपको हंसी का पात्र बना सकता है। आपके लिए खतरनाक भी हो सकता है। कुछ  ऐसी चीजें हैं , जिन्हें फेसबुक पर करने से बचना चाहिए। जरा गौर कीजिएः

1.  खाना खाते वक्त की तस्वीरें- नाश्ता करते और खाना खाते वक्त की तस्वीरें फेसबुक के लिए नहीं हैं। अगर आपको खाना खाते वक्त की  तस्वीरें एफबी पर डालने की जरूरत महसूस हो तो ध्यान रखिए कि वे चुटीली, दिलचस्प और कुछ जानकारी देनी वाली होनी चाहिए।

2. मत बदलिए रिलेशनशिप स्टेटस बार-बार- अगर आप किसी को पसंद करते हैं और उसे इंप्रेस करने के लिए रिलेशनशिप स्टेटस बार-बार बदल रहे हैं, तो यह सही नहीं है। ऐसा करने से फेसबुक पर आपको जानने वाले सैकड़ों लोगों के मन में आपकी गलत छवि बनेगी।

3. जूते-चप्पलों की तस्वीरें-  दोस्तों के साथ जूते चप्पल या पैरों की तस्वीरें लेना भद्दा लगता है। कई बार हमारे  जूते चप्पलों की स्थिति हमें हास्यास्पद बना देती है।

4.हैरान करने वाले मैसेज- हर आम बात को लेकर दूसरों को हैरान परेशान करने वाले मैसेज भेजना सही नहीं है।  ऐसा बार बार करने से आपकी विश्वसनीयता को धक्का लगता है।

5.स्माइली से शोक न जताएं- गमी के मौके पर दुख जताने वाले स्माइली (इमोटीकॉन) का इस्तेमाल न करें। इसे संवेदनहीनता का सूचक माना जा सकता है।

6. इंटरनेट स्लैंग का ज्यादा इस्तेमाल नहीं- LOL और ASAP जैसे नेट स्लैंग का ज्यादा इस्तेमाल न करें। ऐसा करने पर आपके दोस्त आपके पोस्ट और कमेंट हटा सकते हैं।

7. ज्यादा तस्वीरें सही नहीं-  फेसबुक पर जरूरत से ज्यादा फोटो पोस्ट करने से लोग आपको आत्ममुग्धता का शिकार मान सकते हैं।

8. व्यक्तिगत डायरी न बनाएं-फेसबुक पर कोई  भी सीक्रेट और कन्फेशन पोस्ट करने से पहले सौ बार सोचें।  हालांकि आप इन्हें बाद में डिलीट कर सकते हैं, लेकिन याद रखिए, मुंह से निकले शब्द वापस नहीं आते।

9. खुद को बढ़ा-चढ़ा कर न पेश करें-कई बार बड़े बड़े दावे फेसबुक पर आपको अपमान  का सामना करने पर मजबूर कर सकते हैं। मुझे पता है कि आपमें में से ज्यादातर लोग इसे रीपोस्ट नहीं करेंगे लेकिन मेरे दोस्त मेरा साथ जरूर देंगे। इस तरह के कमेंट भारी पड़ सकते हैं।

10. शीशे के सामने खड़ी तस्वीरें पोस्ट करना-आप भले खुद को कितना भी पसंद करें, लेकिन शीशे के सामने खड़े होकर सेलफोन से खींची गई तस्वीरें फेसबुक पर डालना सही नहीं है।

स्रोत-ब्लॉग,  Huffington Post और रसरंग रिसर्च