Sunday, December 5, 2010

हनुमान चालीसा का पाठ क्यों करते हैं?


उज्जैन. कलयुग में हनुमानजी की भक्ति सबसे सरल और जल्द ही फल प्रदान करने वाली मानी गई है। श्रीराम के अनन्य भक्त श्री हनुमान अपने भक्तों और धर्म के मार्ग पर चलने वाले लोगों की हर कदम मदद करते हैं। सीता माता के दिए वरदान के प्रभाव से वे अमर हैं और किसी ना किसी रूप में अपने भक्तों के साथ रहते हैं।
हनुमानजी को मनाने के लिए सबसे सरल उपाय है हनुमान चालीसा का नित्य पाठ। हनुमानजी की यह स्तुति का सबसे सरल और सुरीली है। इसके पाठ से भक्त को असीम आनंद की प्राप्ति होती है। तुलसीदास द्वारा रचित हनुमान चालीसा बहुत प्रभावकारी है। इसकी सभी चौपाइयां मंत्र ही हैं। जिनके निरंतर जप से ये सिद्ध हो जाती है और पवनपुत्र हनुमानजी की कृपा प्राप्त हो जाती है।
यदि आप मानसिक अशांति झेल रहे हैं, कार्य की अधिकता से मन अस्थिर बना हुआ है, घर-परिवार की कोई समस्यां सता रही है तो ऐसे में सभी ज्ञानी विद्वानों द्वारा हनुमान चालीसा के पाठ की सलाह दी जाती है। इसके पाठ से चमत्कारिक फल प्राप्त होता है, इसमें को शंका या संदेह नहीं है। यह बात लोगों ने साक्षात् अनुभव की होगी की हनुमान चालीसा के पाठ से मन को शांति और कई समस्याओं के हल स्वत: ही प्राप्त हो जाते हैं। साथ ही हनुमान चालीसा का पाठ करने के लिए कोई विशेष समय निर्धारित नहीं किया गया है। भक्त कभी भी शुद्ध मन से हनुमान चालीसा का पाठ कर सकता है।

इस रात लड़कियों पर रहता है भूत-प्रेत का डर!


सामान्यत: ऐसी मान्यता है कि रात के समय किसी लड़की को अकेले घर से बाहर नहीं भेजना चाहिए। पुराने समय में इस बात का सख्ती से पालन कराया जाता था। साथ ही अमावस की रात को तो खासतौर पर लड़की को अकेले घर से बाहर निकलना मना किया जाता था।

ऐसा माना जाता है कि अमावस की रात को नकारात्मक शक्तियां अधिक सक्रिय रहती हैं जो कि लड़कियों को बहुत ही जल्द अपने प्रभाव में ले लेती हैं। यहां नकारात्मक शक्ति से अभिप्राय है कि आसुरी प्रवृत्तियां। अमावस की रात बुरी शक्तियां अपने पूरे बल में होती हैं। इन शक्तियों को लड़कियां पूरी तरह प्रभावित करती हैं। जिससे वे उन्हें अपने प्रभाव में लेने की कोशिश करती हैं। इन शक्तियों के प्रभाव में आने के बाद लड़कियों का मानसिक स्तर व्यवस्थित नहीं रह पाता और उनके पागल होने का खतरा बढ़ जाता है।

विज्ञान के अनुसार अमावस और हमारे शरीर का गहरा संबंध है। अमावस का संबंध चंद्रमा से है। हमारे शरीर में 70 प्रतिशत पानी है जिसे चंद्रमा सीधे-सीधे प्रभावित करता है। ज्योतिष में चंद्र को मन का देवता माना गया है। अमावस के दिन चंद्र दिखाई नहीं ऐसे में जो लोग अति भावुक होते हैं उन पर इस बात का सर्वाधिक प्रभाव पड़ता है।

लड़कियां मन से बहुत ही भावुक होती है। जब चंद्र नहीं दिखाई देता तो ऐसे में हमारे शरीर के पानी में हलचल अधिक बढ़ जाती है। जो व्यक्ति नकारात्मक सोच वाला होता है उसे नकारात्मक शक्ति अपने प्रभाव में ले लेती है। इन्हीं कारणों से अमावस की रात को लड़कियों को अकेले बाहर जाने के लिए मना किया जाता था।

चंद्रमा हमारे शरीर के जल को किस प्रकार प्रभावित करता है इस बात का प्रमाण है समुद्र का ज्वारभाटा। पूर्णिमा और अमावस के दिन ही समुद्र में सबसे अधिक हलचल दिखाई देती है क्योंकि चंद्रमा जल को शत-प्रतिशत प्रभावित करता है।

अब टेलीफोन बूथ से बात करते हुए चेहरा भी देखिए


एक जामाना था जब टेलीफोन बूथ या पीसीओ का धंधा खूब चलता था। लेकिन मोबाइल फोन के दिनों दिन बढ़ते इस्तेमाल के चलते ये धंधा काफी मंदा हो गया है। लेकिन अब जानी मानी टेलीकॉम कंपनी ‘एरिक्सन’ ने पीसीओ के कारोबार को मॉर्डन अंदाज में दोबारा शुरू करवाने की दिशा में पहल शुरू कर दी।


पीसीओ को पॉपुलर बनवाने के लिए कंपनी ने एक खास तरह का फोन तैयार किया है। जिसके जारिए आप फोन पर बात करते हुए लोगों का चेहरा भी देख सकेंगे। ये काफी कुछ वीडियो कॉल जैसा है। लेकिन खास बात ये है कि इसमें स्क्रीन काफी बड़ा लगाया गया है। यानी फोन पर बात करते हुए भी ऐसा लगेगा मानो आप आमने-सामने बात कर रहे हों।

एरिक्सन कंपनी इस तरह के पीसीओ को गांवों में पॉपुलर बनाने के जुगत में लगी है, क्योंकि वहां आज भी बड़ी आबादी के पास मोबाइल फोन की सुविधा नहीं है। यही वजह है कि अपने इस खास फोन को लेकर कंपनी ने बिहार, यूपी के गांवों में प्रयोग शुरू कर दिया है। हालांकि इसे व्यावसायिक तौर पर नहीं शुरू किया गया है।

कंपनी को उम्मीद है कि इस नए प्रयोग से एक बार फिर से पीसीओ और टेलीफोन बूथ की तरफ लोगों का रूझान बढ़ेगा। खास तौर पर ग्रामीण इलाकों में कंपनी को अच्छी लोकप्रियता मिलने की उम्मीद है।

Monday, July 19, 2010

मौत की भविष्यवाणी भी करते हैं सपनें


मौत ऐसी सच्चाई है जिसके बारे में सभी जानते हैं लेकिन फिर भी उससे अनभिज्ञ बने रहते हैं। भविष्य में घटने वाली शुभ-अशुभ घटनाओं के तरह सपने मौत की भविष्यवाणी भी करते हैं। आवश्यकता है उनका आशय समझने की। स्वप्न ज्योतिष में ऐसे स्वप्नों की जानकारी दी गई है।

1- जो व्यक्ति स्वप्न में स्वयं को शमशान अथवा पर्वत के शिखर पर बैठकर मदिरापान करता देखता है वह शीघ्र ही मृत्यु को प्राप्त होता है।
2- स्वप्न में जो स्वयं को स्याही अथवा तेल शरीर पर लगाकर गधे की सवारी करता देखता है, उसकी निश्चित रूप से मृत्यु हो जाती है।
3- जो व्यक्ति लगातार भयानक सपने देखता है, उसके प्राण एक वर्ष के भीतर यमराज हर कर ले जाते हैं।
4- यदि कोई स्त्री स्वप्न में स्वयं के सफेद बाल देखती है तो उसका पति से विछोह हो जाता है या उसके पति की मृत्यु हो जाती है।
5- यदि स्वप्न में आप स्वयं को यात्रा पर जाे हुए देंखे तो यात्रा टाल दें क्योंकि यात्रा में आपकी मृत्यु हो सकती है।
6- यदि सपने में शरीर का कोई अंग कटा हुआ देंखे तो निकट भविष्य में किसी परिजन की मृत्यु अवश्यासंभी है।
7- जो व्यक्ति स्वप्न में स्वयं को हंसता या नाचता हुआ देखता है उसकी हत्या हो जाती है।
8- जो व्यक्ति स्वप्न में कौआ देखता है उसे शीघ्र ही किसी की मृत्यु का समाचार मिलता है।
9- यदि कोई स्वयं को स्वप्न में काले कपड़े पहनकर, काले घोड़े पर सवार होकर देखता है तो किसी रोग के कारण शीघ्र ही उसकी मृत्यु हो जाती है।
10- जो व्यक्ति अपने इष्ट देवी की प्रतिमा को फूटते हुए या जलते हुए देखता है उसकी कुछ ही दिनों में मृत्यु हो जाती है।
11- यदि कोई लाल साड़ी पहनी हुई स्त्री स्वप्न में आलिंगन करे व सूखे फूलों की माला पहनाए तो उसकी मृत्यु शीघ्र ही हो जाती है।
12- जो व्यक्ति स्वप्न में स्त्री का स्तनपान करता है, उसकी मृत्यु निश्चित है।
13- यदि कोई लंबे नाखून, पीली आंख नाली निर्वस्त्र स्त्री स्वप्न में आलिंगन करे तो भी मृत्यु हो जाती है।
14- स्वप्न में यदि कोई स्वयं को पेड़ से गिरता हुआ देखता है तो रोग जनित होकर उसकी मृत्यु हो जाती है।
15- यदि कोई व्यक्ति स्वप्न में नगाड़े बते हुए स्वयं का मुंजाडन करवाता है तो शीघ्र ही उसके परिवार में किसी वृद्ध की मौत हो जाती है।

Saturday, July 17, 2010

क्यों होता है पहली नजर में प्यार


एक नजर ही काफी है दिल्लगी के लिए..., पहली ही बार में, एक छोटी सी झलक ने अटूट बंधन में बांध दिया.., पहली ही नजर ऐसी मिली उनसे कि, बस उन्हीं के होकर रह गए सदा के लिये और भी जाने क्या कुछ नहीं कहा जाता इस बारे में।

एक खास उम्र में सबकी पसंद का विषय ही प्यार और प्रेमी हो जाता है। भावनाओं को संभालकर या शांत करके गहराई से विचार करें कि क्या ऐसा होना संभव है। क्या पहली नजर में ही बिना किसी को जाने-पहचाने सच्चा प्रेम किया या करवाया जा सकता है? यदि ऐसा किसी को लगता है कि उसके साथ ऐसा हुआ है, तो क्या वाकई उसे सच्चा अनुभव हुआ है?



कुछ लोग हैं दुनिया में जो सिर्फ और सिर्फ सांइस को ही सच मानते हैं। वहीं कुछ लोग धर्म, ज्योतिष और प्राचीन शास्त्रों पर भी गहरी श्रृद्धा रखते हैं। यानि कि हमें अंतिम निर्णायक किसी एक को नहीं मानना चाहिये बल्कि बीच का रास्ता यानि कि संतुलन बनाने में ही समझदारी है। यानि प्यार जैसे जस्बाती मुद्दे पर हमें सांइस और विज्ञान दोनों की राय लेना चाहिये। तो आइये देखें कि क्या कहता हैं, विज्ञान और ज्योतिष पहली नजर के प्यार के बारे में-



ज्योतिष की नजर से: वीनस यानी शुक्र प्रेम का 'गवर्निंग प्लेनेट' है। शुक्र की स्थिति ही युवाओं की जिंदगी में प्यार और दाम्पत्य जीवन की स्थितियों को नियंत्रित करती है। कुछ अन्य ज्योतिषियों की मान्यता है कि युवाओं की जिंदगी में प्रेम प्रसंगों के लिये कुछ अन्य ग्रह भी जिम्मेदार होते हैं। लेकिन एक्सपट्र्स की मानें तो यह पूर्ण सत्य नहीं है। इसके लिए और भी ग्रह जिम्मेदार हैं। किसी भी युवा लड़के या लड़की की कुंड़ली में बृहस्पति यानी ज्यूपिटर ग्रह शरीर में ऐसे हार्मोन्स की वृद्धि करता है जो विपरीत जेंडर के प्रति आकर्षण बढाता है। यही संयोग जातक में इमोशनल सपोर्ट की अपेक्षाओं को जन्म देता है।



वीनस ग्रह लड़कों में प्रेम का कारक होता है। यही वीनस यानी शुक्र, ज्यूपिटर को संतुलित रखता है। जब किसी कारण से दो प्लेनेट का कॉम्बिनेशन असंतुलित या पूर्णत: एक समान होता है तो प्रेम मिलने का आधार पैदा होता है। चंद्रमा यानी मून, मन का मालिक होता है अत: चंद्रमा का भी प्रेम मिलने में अहम किरदार है। कन्या की कुंडली में चंद्रमा और बृहस्पति एक साथ मजबूत बैठे हों। एक-दूसरे में दृष्टि संबंध हो। स्थान परिवर्तन योग हो। शुक्र बृहस्पति के मुकाबले कमजोर हो। नवम-पंचम में हो तो प्रेम का योग बनता है।



विज्ञान की नजर से: सांइस की माने तो पहली नजर का प्यार जैसी कोई चीज नहीं होती। यह मात्र आकर्षण का ही परिणाम होता है। रसायन विज्ञानियों का मानना है कि ऐसा तब होता है जब शरीर में एक विशेष प्रकार हार्मोन्स का स्राव होने लगता है। किन्तु यदि हम मनोविज्ञान के दृष्टिकोण से सोचेंगे तो एक नई और अधिक व्यावहारिक बात सामने आएगी। वह यह कि इंसानी मन की यह फि तरत होती है कि उसे जिस काम से रोका जाए ,उसे उसी काम में अधिक रस मिलता है। लड़के और लड़कियों को बचपन से एक दूसरे से दूरी रखने का निर्देश दिया जाता है, जिससे उनके मन जिज्ञासा और भी बढ़ जाती है।

Saturday, July 10, 2010

कितने प्रेम प्रसंग बता देगी विवाह रेखा

हस्तरेखाएं भी ज्योतिष शास्त्र में काफी महत्व रखती हैं। हाथों की रेखाओं को व्यक्ति का दर्पण कहा जा सकता है। जो बात आप अपनी आंखों से, चेहरे के हाव-भाव से छुपा जाते हैं वे हाथों की लकीरें बता देती हैं।

अधिकांश लोग अपने प्रेम प्रसंग सभी से छुपाते हैं परंतु यदि कोई जानना चाहे तो उसके हाथों में विवाह रेखा को देखकर सब कुछ जान सकता है।

विवाह रेखा: सबसे छोटी उंगली के नीचे बुध पर्वत के प्रारंभिक भाग में होती है। यह रेखाएं आड़ी होती हैं। यदि ये रेखाएं एक से अधिक हैं तो ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ऐसा माना जाता है कि उस व्यक्ति के उतने प्रेम प्रसंग रहे हैं।

यदि यह रेखा टूटी हो या कटी हुई हो विवाह विच्छेद की संभावना होती है। साथ ही यह रेखा आपका वैवाहिक जीवन कैसा रहेगा यह भी बताती है। यदि रेखाएं नीचे की ओर गई हुई हों तो दांम्पत्य जीवन में आपको काफी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

Sunday, June 13, 2010

शैतान बना देती है शराब..!

Tawaniya Network
First Published 10:00[IST](13/06/2010)
Last Updated 10:51 AM [IST](13/06/2010)
विशेषः अल्कोहल अनाज, फलों और सब्जियों को खमीरीकृत करके एक विशेष प्रक्रिया से बनाई जाती है। इसमें बैक्टीरिया खाने की शक्कर को अल्कोहल या शराब में बदल देते हैं। अल्कोहल के कई प्रकार होते हैं और इसे क्लीनर या एंटीसेप्टिक की तरह भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

शराब के तौर पर एथेनॉल का प्रयोग किया जाता है। शराब का नशा सिर्फ पीने वाले को ही नहीं उससे जुड़े हर व्यक्ति पर असर डालता है। यह उस शैतान की तहर है जो इंसान को बाहर से हैवान बना देती है और अंदर ही अंदर उसे खोखला भी कर देती है। दक्षिण अफ्रीका में चल रहे फीफा वर्ल्ड कप में खिलाड़ियों के शराब पीने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। गुजरात देश का एक मात्र राज्य है, जहां शराब पर प्रतिबंध लगा हुआ है। इसके साथ ही मुस्लिम धर्म में भी शराब पीना प्रतिबंधित है।

हर हिस्से पर प्रभाव शराब जैसे ही मुंह में पहुंचती है, जीभ में मौजूद स्वाद इंद्रियां सक्रिय हो जाती हैं। शराब तेजी से गले से होती हुई छोटी आंत फिर बड़ी आंत में पहुंचती है। यहां अवशोषित होने के बाद खून में मिलती है और यहीं से शरीर के हर हिस्से को प्रभावित करती है। इसके कारण शरीर की क्रियाविधि को नियंत्रित करने वाला तंत्रिका तंत्र प्रभावित होने लगता है। इसके कारण शरीर द्वारा दिमाग को भेजे जाने वाले कुछ संदेश प्रभावित होने लगते हैं। इसकी वजह से व्यक्ति की भावनाओं, हरकतों, देखने, सुनने और विचारों को बदल देता है।

घंटों रहती है शरीर में

शराब का १क् प्रतिशत हिस्सा सांस, पसीने और मूत्र के द्वारा शरीर से बाहर निकल जाता है। शराब का शेष भाग चयापचय (मेटाबोलिक) की प्रक्रिया में टूट जाता है। लिवर एंजाइम्स के जरिए शराब को पचाता है। हालांकि, इस दौरान लिवर काफी कम मात्रा का चयापचय कर पाता है और शेष शराब खून के जरिए शरीर में घूमती रहती है। शराब के चयापचय की दर पीने वाले के वजन, उसकी लंबाई, लिंग, जाति, कितनी तेजी से शराब पी गई है और अन्य बातों पर निर्भर करती है। शराब के चयापचय की दर ब्लड अल्कोहल कंसनट्रेशन (बीएसी) .क्१५ प्रति घंटे के हिसाब से होती है। यानी अगर किसी व्यक्ति ने क्१. बीएसी अल्कोहल लिया है तो उसके पचने में ६.६६ घंटे का समय लगेगा।

दुनिया में आगे भारत

भारत दुनिया में सबसे अधिक शराब का उत्पादन करने वाले देशों में से एक है। पिछले १५ वर्षो में देश में शराब का उत्पादन तेजी से बढ़ा है और वर्तमान में यह २,३क्क् मिलियन लीटर से अधिक हो चुका है। दक्षिण-पूर्वी एशिया में भारत की उत्पादन में हिस्सेदारी ६५ फीसदी से अधिक है। आंध्र प्रदेश, पंजाब, गोवा और उत्तरी भारत में शराब पीने की दर सबसे अधिक है।

असम, अरुणांचल प्रदेश, सिक्किम और पूर्वोत्तर, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ में देश के अन्य हिस्सों की तुलना में महिलाएं अधिक शराब पीती हैं। उधर, सुप्रीम कोर्ट ने युवाओं के नशे के चंगुल में फंसते जाने पर चिंता जताई है। कोर्ट का कहना है कि राज्यशराब पर प्रतिबंध लगाने में गंभीर दिखते हैं, लेकिन उन्हें लागू नहीं करते हैं। दिल्ली के एक्साइज कमिश्नर के अनुसार, शराब उद्योग से राजस्व के रूप में २७,७७८ करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त होता है। अगर शराब पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा तो राज्यों को हजार करोड़ रुपए का वर्षिक नुकसान होगा।

भ्रामक तथ्य मैं जब चाहूंगा, छोड़ दूंगा।

हो सकता है कि आप शराब छोड़ सकते हों, लेकिन अधिकतर लोग जब चाहें तब शराब पीना नहीं छोड़ सकते। नियमित रूप से शराब पीने वाले पीने के लिए कोई न बहाना बनाएंगे।

शराब मेरी समस्या है, मैं दूसरों को नुकसान नहीं पहुंचाता।

आपके शराब पीने से सिर्फ आपको ही नहीं पूरे परिवार को नुकसान होता है। यह नुकसान आर्थिक और सामजिक दोनों तरह से होता है। शराब पीकर अगर आप लड़ाई-झगड़ा नहीं करते हैं और सोचते हैं कि किसी को कोई नुकसान नहीं है तो भी आप कम से कम अपने शरीर के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, जो आगे आपको बीमार बना देगा।

मैं रोज नहीं पीता हूं, तो मैं अल्कोहलिक नहीं हूं।

अल्कोहलिक होने का यह अर्थ नहीं है कि आप क्या पीते हैं, कितना पीते हैं और कब पीते हैं। अगर आपके पीने से आपके जीवन में समस्याएं हो रहीं हैं आपके परिवार को समस्या हो रही है या फिर सामाजिक क्षति हो रही है तो आप अल्कोहलिक हैं।

नहीं रहती निर्णय लेने की क्षमता

शराब पूरे शरीर का सिस्टम बिगाड़ देती है। खासतौर पर यह व्यक्ति की सोच और निर्णय लेने की क्षमता को बुरी तरह प्रभावित करती है। उसका नजरिया एकदम बदल जाता है। इसके कारण व्यक्ति की पेशीय गतिविधियांे पर भी असर पड़ता है। यानी उसके हाथ के मूवमेंट्स, बोलने की क्षमता तक बुरी तरह प्रभावित हो जाती है। इसलिए शराब पीने के बाद ड्राइविंग करने को मना किया जाता है। हालांकि ये सारी बातें व्यक्ति द्वारा ली जाने वाली शराब की मात्रा पर भी निर्भर करती है। धीरे-धीरे शराब पीना शरीर की जरूरत बन जाता है। यह किसी दवा की तरह ही है। जैसे व्यक्ति को नींद की गोली लेने की आदत पड़ जाती है, ठीक उसी तरह वह शराब पीने का आदी हो जाता है।

- प्रोफेसर उदय जैन, पूर्व विभागाध्यक्ष, बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी

डिप्रेसेंट है शराब

ज्यादातर लोगों का मानना है कि शराब उत्प्रेरक का काम करती है यानी व्यक्ति को उत्तेजित या उन्मादी बना देती है, लेकिन ऐसा नहीं है। दरअसल शराब एक डिप्रेसेंट है। यह जैसे ही शरीर में जाती है, उसकी हर गतिविधि को धीमा कर देती है। आपके शरीर में मौजूद खून में क्.क्५ प्रतिशत अल्कोहल भी उसमें मिल जाए तो स्थिति नियंत्रण के बाहर हो जाती है। ऐसे में व्यक्ति यदि किसी बात से परेशान है तो वह बात धीरे-धीरे विकराल रूप धारण कर लेती है। सीहोर जिले के इछावर मामले मंे भी यही हुआ। व्यक्ति की दो पत्नियों से पांच बेटियां थीं। गरीब होने के कारण उनके भरण-पोषण से लेकर शादी तक की जिम्मेदारी उठाने मंे वह खुद को असमर्थ महसूस कर रहा होगा। संभवत: इसी कारण वह अवसाद में होगा। जब उसने शराब पी तो उसकी चिंता गुस्से में तब्दील हो गई। शराब और गुस्से का असर यह हुआ कि उसने निर्ममता से अपनी पांच बेटियों को मार डाला।

-डॉ. विनय मिश्रा, मनोविश्लेषक

वॉर्निंग साइन

इसके लिए स्ट्रेटलाइन टेस्ट होता है। इसमें आप जमीन पर सीधी लाइन खींचें और व्यक्ति को उस पर चलने के लिए कहें। यदि सीधी लाइन पर चलते वक्त उसके कदम लड़खड़ाने लगते हैं तो इसका मतलब है कि वह नशे में धुत है।

सुबह उठने के बाद व्यक्ति को याद ही नहीं रहता कि बीती रात क्या हुआ? मसलन उसने किसी से फोन पर बात की या किसी से झगड़ा हुआ। यहां तक कि उसे यह भी ध्यान नहीं रहता कि वह घर कब लौटा और कब उसे नींद लगी। इसे मेडिकल भाषा में मॉर्निग ब्लैंक कहते हैं।

शराब के आदी कुछ लोगों में मॉर्निग ड्रिंकिंग का चलन भी है। सुबह उठते से ही उन्हें शराब की जरूरत महसूस होती है। शराब का सेवन किए बिना उनके सिर या शरीर में दर्द भी हो सकता है।

कहां, कैसा असर और दुष्प्रभाव

तंत्रिका तंत्र

शराब तंत्रिका तंत्र में प्रभाव डालती है। इससे ब्रेन हैमरेज हो सकता है। अधिक मात्रा में शराब पीने से लकवा मार सकता है या मौत भी हो सकती है। तंत्रिका तंत्र के प्रभावित होने से अंगों पर दिमाग का नियंत्रण कम हो सकता है। अधिक शराब पीने से यह समस्या स्थायी भी हो सकती है।

रक्त संचरण

पेट में शराब के पहुंचते ही उसका खून में मिलना शुरू हो जाता है। यह खून में मौजूद श्वेत रक्त कणिकाओं को खत्म करने लगती है। इससे ब्लड प्रेशर कम होने लगता है, जिससे बेहोशी छाने लगती है।

पेट

शराब जीभ की स्वाद कलिकाओं और लार बनने को भी प्रभावित करती है। पाचन प्रक्रिया खराब हो जाती है। ऐसा होने पर भोजन नहीं पचता है और उल्टी होने लगती है। आंतों में सूजन आ जाती है और आंत
का कैंसर हो सकता है।

कॉर्टेक्स

शराब से मस्तिष्क के अग्रभाग कॉर्टेक्स की कार्यप्रणाली बाधित होती है। यह हिस्सा सोचने और समझने की क्षमता के लिए जिम्मेदार होता है। ऐसे में व्यक्ति को सही-गलत का ध्यान नहीं रहता। ऐसे में नशे का शिकार व्यक्ति दूसरो को क्या खुद को भी नुकसान पहुंचाता है और उसे इसका पता नहीं होता।

हृदय

हृदय पर चर्बी की परत जमने लगती है और इसका आकार और भार बढ़ने लगता है। ऐसा होने पर शराब पीने वाले की हृदय गति धीमी या अनियमित हो जाती है।

लिवर

शराब से लिवर में सूजन आ सकती है और इसके लिवर सिरोसिस तक हो सकता है। सूजन के अधिक बढ़ने पर लिवर में बेतहाशा दर्द होता है। इसके साथ ही किडनी पीली होने लगती है। इसका प्रभाव पीने वाले की आंखों पर दिखाई देने लगता है। अल्कोहल का मनुष्य के पूरे यूरीन सिस्टम पर प्रभाव पड़ता है।